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जीवों का द्विनाम पद्धति का संक्षिप्त इतिहास एवम् संक्षिप्त जानकारी

जीवों का द्विनाम पद्धति का संक्षिप्त इतिहास एवम् संक्षिप्त जानकारी
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सोमवार, 21 जून 2021

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जीवो के नामकरण की द्विनाम पद्धति 




 >> सन् 1755 ई. में केरोलस लीनियस नामक वैज्ञानिक जिन्हे वार्गिकी का जन्म दाता (Father of taxonomy) भी कहा जाता है, ने जीवो की द्वीनाम पद्धति को प्रचलित किया इस पद्धति के अनुसार प्रत्येक जीवधारी का नाम लैटिन भाषा के दो शब्दो से मिलकर बनता है पहला शब्द नाम (Generic name) तथा दूसरा शब्द जाती ( Species name) कहलाता है वंश तथा जाती नामो के बाद उस वर्गीकिवि (वैज्ञानिक) का नाम लिखा जाता है जिसमे सबसे पहले उस जाती की खोज या जिसमे इस जाती को सबसे पहले वर्तमान नाम प्रदान किया 


जैसे -- मानव का वैज्ञानिक नाम होमोसेपियंस लिन (Homosapiens) (linn) है

 वर्तमान में (होमो) उस वंश का नाम है जिसकी एक जाती सेपियंस है लिन( linn) वास्तव में लीनीयस ( linnaeus) शब्द का संक्षिप्त रूप है इसका अर्थ यह है की सबसे पहले लीनियस ने इस जाती को होमो सेपियंस (Homo sapiens) नाम से पुकारा है




कुछ जीवधारियों के वैज्ञानिक नाम 

मनुष्य (Human) >> Homo sapiens


मेढ़क( Frog ) >> Rana tigrina 


बिल्ली ( Cat) >> Felis domestica


कुत्ता (Dog) >> Canis familiar


गाय (Cow) >> Bas indicus


मक्खी(house Fly) >> Musca domestica


आम( mango) >> Mangifera indica


धान( Paddy) >> Oryza sativa


गेहूं( Wheat) >> Triticum aestivum


मटर(Pea) >> Pisum sativum

  

चना( Gram) >> Cicer arietinaum


सरसो( Mustard) >> Brassica campestris


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